इतिहास
सदियों बटि गढ़वाल हिमाल मा मनखियों को रौंण उन्नी च जन भारती उपमहाद्वीप मा लोग रौंणा छिन। कत्युरी राजबंस गढ़वाल को पैलु राजवंश छौ, अर ऊन उत्तराखंड मा राज कैरी अर वेकु इतिहास इन पता लगदु किलैकी आज भि ऊंका द्वारा बणया मन्दिर अर शिलालेख छिन। अर कत्युरी राज वंश का पतन का बाद इन मने जांदू कि गढ़वाल चौंसठ रियासतों से जादा भागो मा बटि गै, अर उख अलग-अलग मुखिया राज करण लगि गैनि। अर यों रियास्तों मा एक खास रियासत छै जीं को नौं चांदपुरगढ़ छौ, अर ईं रियासत पर कनकपाल का वंशजों को राज छौ।
15वीं सदी का बीच मा, कनकपाल का वंशज जगतपाल (1455 स्यूं 1493 ई.) का बगत मा चांदपुरगढ़ एक शक्तिशाली रियासत बणि गै। 15वीं सदी का आखिरी तक अजयपाल चांदपुरगढ़ का सिंहासन पर बैठी गै अर वेन गढ़वाल इलाका की अलग-अलग रियासतों तैं मिलै के एक राज्य का रूप मा जोड़ दिनी। अर तब बटि ही ये इलाका को नौ गढ़वाल पड़ि गै।अर येका बाद वेन 1506 से पैली अपणी राजधानी चांदपुर बटि देवलगढ़ और बाद मा 1506 अर 1519 का बीच श्रीनगर मा कैर दिनी।
अर वेका बाद अजयपाल अर वेका बाद आण वला लोगु न तीन सौ सालों तक गढ़वाल पर राज कैरी, अर ये बगत ऊतैं कुमाऊ, मुगलों सिखों अर रोहिल्लाओं को हमला झिलण पोड़ी। अर गढ़वाल का इतिहास मा सबसे खतरनाक हमला गोरखा लोगु को छौ, अर यु लोग अपणा खतनाक हमला खुणी ही जने जान्दा छा, अर 'गोरख्यानी' शब्द लूटपाट करण वली सैना को दुसरू नौ बण गै। डोटी अर कुमाऊं पर कब्ज़ा करण का बाद, गोरखाओं न गढ़वाल पर हमला कैर दिनी अर गढ़वाली सिपयों का द्वारा रुकण का बाद भि वु लोग लंगूरगढ़ तक पौंछि गैनि। मगर जब चीनी लोगु का द्वारा हमला की खबर ऐ, त ऊं गोरखा सिपयों तैं घेरा हटाण पोड़ी अर 1803 मा ऊं न फिर हमला कैरी।
अर कुमाऊं पर जीत हासिल करण का बाद, ऊन तीनभागों मा गढ़वाल पर हमला कैरी। अर पांच हज़ार गढ़वाली सिपै ऊंका हमलों को सामना नि कैर सकिन, इलै राजा प्रद्युम्न शाह अपणी जान बचाणु खुणी देहरादून भाग गै। खुरबुरा की लड़ाई मा गढ़वाली सिपयों को भारी नुकसान ह्वे, अर राजा खुद भि मारी गै। अर वेका बाद 1804 मा, गोरखा पूरा गढ़वाल इलाके का मालिक बण गैनि अर ऊन बारह सालों तक राज कैरी।
अर अंग्रेजों न गोरखा लोगु तैं गढ़वाल बटि खदेड़ी के काली नदी का दुसरा पार भगै दिनी अर इनके 1815 मा गोरखा लोगु को राज खत्म ह्वे गै। अर गोरखा लोगु कि हार का बाद 21 अप्रेल 1815 मा अग्रेजों न अलकनंदा अर भागीरथी नदियों का पूर्व दिशा कि तरफा गढ़वाल का इलाका का पूरब इलाका तैं अपणु बनै दिनी, अर वेका बाद 'ब्रिटिश गढ़वाल' अर देहरादून दून बुले जाण लगि गै। अर गढ़वाल को बचयु दुसरू हिस्सा जु पश्चिम दिशा कि तरफा छौ, वु राजा सुदर्शन शाह तैं वापस दे दिये गै, अर वेन टिहरी मा अपणी राजधानी बनै दिनी। अर सुरुवात मा सरकारी विभाग कुमाऊं अर गढ़वाल का कमिश्नर तैं सौंपे गै, अर हेडक्वार्टर नैनीताल मा छौ। मगर 1840 मा गढ़वाल तैं अलग कैरिके एक जिला का रूप मा बनै दिनी, अर फिर दुसरा कमिश्नर को हेडक्वार्टर पौड़ी मा बण गै।