गढ़वाली पवित्र मन्दिर

 

 

🛕 पुरणा मन्दिर अर शुरुआत का मन्दिर

गढ़वाल मा मन्दिरों को इतिहास भौत पुराणु च, जु मन्दिर पुराणी कहानियों बटि जुडया छिन जन कि —शिव, विष्णु और देवी (देवी) जन देवताओं बटि जुड़ी कथा कहांणी, रामायण अर महाभारत जन कहानियों बटि जुडया मन्दिर छिन।
अर कुछ पवित्र जगा जन कि जख देवी सती का सरीर का हिस्सा गिरयां छा, सिव लिंग या दूसरा तरौं कि शक्तिशाली जगा अर या जगा ही पूजा अर परम्परा का एतिहासिक परमाण छिन।


✨ गढ़वाल साम्राज्य अर मंदिरों को संरक्षण


9 वीं सदी की शुरुआत बटि ही, गढ़वाल राज्या एक हिमालया राज्य का रूप मा मसूर ह्वे। अर भौत सरी रियासतों तैं एक जुट करण का बाद, मुखियों न धार्मिक अर राजनीतिक अधिकारी दुयों न आफ तैं साबित करणु खुणी ढून्गों अर लकडों का मंदिर बणाणु खुणी आदेस दिनी।
अर सुरुवात का बगत पर लिखित दस्तावेज भौत कम छिन, यों मूर्तियों कि तारिक पता करणु खुणी आर्कियोलॉजिकल सबूत याने कि (शिलालेख, आइकनोग्राफी, मंदिर की बनावट) भौत ज़रूरी छिन।

 

🛕 मंदिर बनण को बगत

गढ़वाल का जादातर मन्दिर लगभग 6वीं अर 16वीं सदी का बगत का बणया छिन,

हालांकि मरम्मत को काम अर फिर बनाण को काम बाद मा ह्वे। अर यों तैं बनौंण को नक्सा उत्तर भारत मन्दिर कला अर हिमालय का इलाका की तकनीक को मिश्रण च, यों तैं इन बणये गै कि ताकि वू भूकंप अर बर्फ़बारी तैं झेली सैका।

 

🛕 गढ़वाल मा पुरणा अर इतिहासिक मन्दिरों को उदारण


हम कुछ ख़ास मन्दिरों जनै अपणु धन्यान लगौला, किलैकी ऊंको इतिहास पुराणु च अर कथा कहाणीयों पर आधारित च।

 


✨ केदारनाथ को मंदिर

गढ़वाल हिमालय मा सबसे ऊंचै पर च, अर यु मन्दिर शिव का 12 लिंगों मा बटि एक च — अर यु भारत का सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों मा बटि एक च।

ये को इतिहास भौत पुराणु च, इन मने जांदू कि ये मन्दिर तैं आदि शंकराचार्य न लगभग 8वीं सदी मा बनै, हालांकि ये मन्दिर की पूजा इन मने जांदू की बौद्ध धर्म अर शुरुआती अर मध्यकालीन बगत का पैले से किये जांदी च।

मंदिर को इतिहास कहानियों अर भक्ति से जुड़यु च — अर यु मन्दिर पांडवों का पापों से मुक्ति से जुड़यु च — अर यु सदियों से एक मुखिया धार्मिक स्थल च।


⛩️ रघुनाथ को मंदिर, देवप्रयाग

इन मने जान्दू की देवप्रयाग (टिहरी गढ़वाल) मा यु विष्णु को मंदिर 8वीं-9वीं सदी मा बणयु छौ, अर यु आदि शंकराचार्य अर अलवर का संत साहित्य (तमिल भक्ति ग्रंथ) से जुड़यु च।

अर येको आर्किटेक्चरल स्टाइल अर शिलालेख शुरुआती मधया काल उत्तर भारत मंदिर परंपराओं का बारा मा दिखान्दू च।

 


🛕 चंद्रबदनी देवी को  मंदिर

यु मन्दिर चंद्रकूट रेंज का मथी च, यु पवित्र मन्दिर शक्ति पीठ कि परंपरा से जुड़यु च — अर इन मने जान्दू कि इख सती का शरीर का कुछ हिस्से गिरी छा — अर इख पुराणा लोहा का त्रिशूल अर मूर्तियाँ छिन।

 


⛰️ बिनसर महादेव को मन्दिर

पौड़ी गढ़वाल की ऊँची हिमालया की घाटी मा शिव भगवान तैं समर्पित एक पुराणु चट्टान पर बणयु मंदिर च। यु मन्दिर लगभग 9वीं10वीं सदी का बणयु होलु अर आदि बद्री अर जागेश्वर मंदिर गुट शुरुआती मंदिर शैलियों से जुड़यु च।

किलैकी ये मन्दिर को कुई लिखयु रिकॉर्ड नि च, मगर लोक कथा  — ईं जगा को श्रेय पांडवों या स्थानीय राजाओं तैं देन्दा छिन  — इलै इतिहासिक कहानी तैं पूरा करदी छिन।

 


⛩️ सुरकंडा देवी को मंदिर (टिहरी गढ़वाल)

परमार वंश का द्वारा लगभग 1000 ई स मा यु मन्दिर बणव्ये गै, अर यु मन्दिर पहाड़ अर नागर आर्किटेक्चरल असर वाला देवी (देवी) तैं समर्पित एक बडू इतिहासिक मंदिर च।

 

📍 गढ़वाल का दुसरा पुरणा मन्दिर

यों मन्दिरों मा श्रीनगर को कमलेश्वर महादेव मंदिर भि शामिल च — अर यु मन्दिर राम अर पुरणा शिवलिंग से जुड़यु च — अर देवल गौं का मंदिर क्लस्टर जन मंदिरों को समूह च, जु 12वीं-13वीं सदी का बीच वला मंदिर बनौंण की परंपराओं तैं दिखान्दी च।

 


🪔 मंदिरों की बनावट अर सांस्कृतिक विरासत

क्षेत्रीय बनावट: गढ़वाल का मंदिरों मा (उत्तर भारत) बनावट तैं स्थानीय पहाड़ का दगड़ा मा मिलये जान्दू च — जनकी मज़बूत आधार, पत्थर का बिम्ब, अर बर्फ़बारी अर भूकंप से बचणु  खुणी पठालों वाली छत।

 


📜 सारांस

“गढ़वाल का पुराणा मंदिर” कुई एक जगा नि छिन, बल्कि मा पौराणिक कथाओं, शाही संरक्षण, भक्ति प्रथाओं अर हिमालयी कारीगर से तराशी पुराणी पवित्र जगहों को एक जाल च। यों मन्दिरों को इतिहास कम से कम शुरुआती मध्यकालीन काल (6th–8th सदी ) से लेकर राजपूत अर गढ़वाल साम्राज्य का युग (16th सदी अर वेका बाद तक) तक फैल्यु च। भौत सरा मंदिर देवताओं, ऋषियों अर महाकाव्य नायकों की कहानियों से जुड़यु च, अर मंदिरों मा सबूत गढ़वाल हिमालय का समृद्ध आध्यात्मिक अर सामाजिक-राजनीतिक अतीत पर रोशनी डालदी च।
 

गढ़वाल

Your encouragement is valuable to us

Your stories help make websites like this possible.