हिमालय

क्या आज हम लोग अपणी बोलि भाषा अर अपणा रीती रिवाजों तैं भुलणा छां?  

हिमालय

मेरा उत्तराखण्डी भै-बैणों, गढ़वळी बोलि की ईं वेबसाइड मा हम आप सभ्यों को स्वागत करद्‍या।

हमरि ईं वेबसाइड मा आप तैं हमरि गढ़वळी संस्कृति का बारा मा गढ़वळी गीत अर विडियो

अर गढ़वळी बोलि की वणमाला का बारा मा देखणु कू मिललु।

ब्यो
गढ़वाली चित्र

आज को वचन

सैरा स्वर्गदूत सिंहासन का चौ तरपां अर दाना-सयाणों अर चार ज्यून्दा प्राणियों का चौ तरपां खड़ा छा, फिर उ सिंहासन का संमणी मुख का बल गिरिनि अर पिता परमेश्वर की आराधना कैरी, ऊंल बोलि, “आमीन, हमारा पिता परमेश्वर, हम हमेशा तेरी महिमा अर स्तुति करदा, त्वे तैं धन्यवाद अर सम्मान दींदयां! हम मणदा छा कि तू सम्पूर्ण रीति से ज्ञानवान छै, अर सामर्थी छै, जु हमेशा कु सभि कामों तैं कन मा योग्य च, आमीन।”

प्रकाशित वाक्य 7:11
    Terms & Conditions
    Location

    Your encouragement is valuable to us

    Your stories help make websites like this possible.