हिमालय

क्या आज हम लोग अपणी बोलि भाषा अर अपणा रीती रिवाजों तैं भुलणा छां?  

हिमालय

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ब्यो
गढ़वाली चित्र

आज को वचन

एक बगत पैली, तुम ढिबरों का जन छा जु गलत रस्ता पर जांणि छै जौनु अपड़ो रस्ता हरचै दींनि; पर अब तुम मसीह मा लौटि अयां जु तुम्हरा आत्मा को चरवाहा (अध्यक्ष) अर रखवलो च।

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