हिमालय

क्या आज हम लोग अपणी बोलि भाषा अर अपणा रीती रिवाजों तैं भुलणा छां?  

हिमालय

मेरा उत्तराखण्डी भै-बैणों, गढ़वळी बोलि की ईं वेबसाइड मा हम आप सभ्यों को स्वागत करद्‍या।

हमरि ईं वेबसाइड मा आप तैं हमरि गढ़वळी संस्कृति का बारा मा गढ़वळी गीत अर विडियो

अर गढ़वळी बोलि की वणमाला का बारा मा देखणु कू मिललु।

ब्यो
गढ़वाली चित्र

आज को वचन

पर जब तु उपवास कैरी त अपड़ा मुंड पर तेल लगौ अर मुक धो। कि लोग न पर तेरु परमेश्वर पिता जै तैं तु देख नि सकदी, त्वे तैं उपवासी जांणो। ईं दशा मा तेरु परमेश्वर पिता जु गुप्त मा दिखद कि लोग न पर तेरु परमेश्वर पिता त्वे तैं प्रतिफल दयालो।

मत्ती 6:17
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